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बारिश की बूँदें

Posted On: 8 Sep, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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रचना काल–११ जुलाई १९९९
————————————-
फर्श पर गिरती बारिश की बूँदें,
इधर उधर भागती, नाचती
कभी बनती तो कभी बिगडती,
मोतियों जैसी
दिल ने चाहा, मुट्ठी मैं भर लूं,
सहेजकर रख लूँ..कुछ पल के लिए ही सही,
किन्तु एक पल ही तो उनकी आयु है,
और म्रत्यु से पहले ही उन्हें……….
नहीं..नाचने दो फर्श पे उन्हें,
उन्मुक्त भाव से,
बिखरने दो इधर उधर,
आकार खो कर आकार पाने दो,
फैलने दो अंतिम बिंदु तक,
सत्य मैं हस्तक्षेप ठीक नहीं,
सत्य अटल है म्रत्यु की तरह और शाश्वत भी,
ठीक वैसी ही हैं–,
ये बाल सुलभ
फर्श पर गिरती बारिश की बूँदें|

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 24, 2012

प्रिय हिमांशु जी खूबसूरत ….सच है अपनी गति से , अपनी प्रकृति से , खेल ले जी भर .. न छेड़े ..उस नैसर्गिक पल का आनंद और कहाँ …. आकार खो कर आकार पाने दो, फैलने दो अंतिम बिंदु तक, सत्य में हस्तक्षेप ठीक नहीं, सत्य अटल है म्रत्यु की तरह और शाश्वत भी, सुन्दर ..सटीक भ्रमर ५

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    October 6, 2012

    भ्रमर जी, धन्यवाद देने मैं देरी (व्यस्तता के कारन) के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ. आपके blogs पड़े , बहुत ही सुन्दर लेखन है… पुनश्च: सराहना के लिए नमन…..

ashishgonda के द्वारा
September 12, 2012

सुन्दर कविता……

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 12, 2012

    धन्यवाद प्रिय…

vikramjitsingh के द्वारा
September 9, 2012

बढ़िया प्रस्तुति…….

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    निरंतर प्रेरणात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार, विक्रमजी…

reena के द्वारा
September 8, 2012

अति सुन्दर , सच में बहुत सुन्दर

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    रीना जी, मुझे खुसी है की, रचना आपके व पाठकों के दिल तक पहुंची..आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद…

Punita Jain के द्वारा
September 8, 2012

हिमांशु जी, बहुत सुन्दर सन्देश देती है आपकी यह कविता | हमारा जीवन भी पानी की बूंद की तरह ही है | किसी कवि ने कहा भी है —–जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाये रे, .होनी अनहोनी कब क्या घट जाये रे |

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    पुनीता जी, कविता के मर्म को आपने समझा, मेरा सौभाग्य है…बहुत आभार..


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