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आओ बीती बात भुलाएँ

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रचना काल–१ फ़रवरी २००३
————————————
आओ बीती बात भुलाएँ|

प्रेम घ्रणा का सह-आलिंगन,
पुष्पलता का वह मधु चुम्बन,
सर्पदंश का दर्द मिटायें,
आओ बीती बात भुलाएँ|

प्रज्ज्वलता के संगी साथी,
पर रिक्त दिए मैं सूनी बाती,
फिर से शांत द्वीप जलाएं,
आओ बीती बात भुलाएँ|

गर्वित मन के सुस्वप्नों को,
दुःख के तम में हम अपनों को,
अवसर देकर आजमायें,
आओ बीती बात भुलाएँ|

प्रकृति प्रयास प्रदत्त जीवन,
दिवस निशा के सहभागी बन,
अधिकारों का भेद मिटायें,
आओ बीती बात भुलाएँ|

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashishgonda के द्वारा
September 12, 2012

आदरणीय! कविता का असर दिखने लगा, लाजवाब

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 12, 2012

    प्रिय आशीष, सराहना के लिए सुभाशीष …..

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 10, 2012

    प्रज्ज्वलता के संगी साथी, पर रिक्त दिए मैं सूनी बाती, फिर से शांत द्वीप जलाएं, आओ बीती बात भुलाएँ|,,,,      बीती बात भुलाय के आगे की सुध ले ,,,,,,,,,बहुत अच्छी रचना निर्भय जी बधाई हो,,

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    शर्मा जी, आशीर्वाद के लिए धन्यबाद..

vikramjitsingh के द्वारा
September 9, 2012

आने वाले सुनहरी ‘कल’ का स्वागत करने को प्रेरित करती हुई सुन्दर प्रस्तुति….. धन्यवाद……निर्भय जी….

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    वास्तविक मूल्यांकन के लिए आभार, विक्रम जी,….

drbhupendra के द्वारा
September 9, 2012

बहुत सुन्दर श्री मान ….. बात दोनों तरफ वालो को भुलाने पर ही मामले का हल निकलता है…. दिक्कत तब होती है जब एक तो भूल गया और दूसरा ताक में बैठा है… सुन्दर … अति सुन्दर..

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    डाक्टर साहेब, आपकी संदेशात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद…

Punita Jain के द्वारा
September 8, 2012

हिमांशु जी, प्रज्ज्वलता के संगी साथी, पर रिक्त दिए मैं सूनी बाती, फिर से शांत द्वीप जलाएं, आओ बीती बात भुलाएँ|—–सुन्दर पंक्तियाँ | आपकी पिछली कविता की तरह यह कविता भी एक सुन्दर सन्देश देती है | सन्देशप्रद कविता लिखने के लिए आपको बधाई |

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 10, 2012

    बहुत धन्यवाद पुनीता जी,

manjusharma के द्वारा
September 8, 2012

आपकी कविता सच में ही बीती बातें भुलाने का मन बना रहीं हैं सुंदर कविता

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 8, 2012

    मंजू जी, कविता आपके ह्रदय को छू गयी बस यही उसके सार्थकता है…. सच्ची प्रतिक्रिया खुद-ब-खुद बयां होती है…हार्दिक आभार.


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