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अपनी बात

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रचना काल–१५ मई २००८
——————————

मैं भारत का आम आदमी, अपनी बात कह सकता हूँ|

भ्रष्ट व्यवस्था पर न बोलूं
मैं ऐसा इंसान नहीं,
भारत माँ का अपना बेटा,
मैं कोई मेहमान नहीं,
दौड़ रहा है खून रगों मैं,
मै कोई बेजान नहीं,
मुंह पर काला कपडा बांधे,
मौन नहीं रह सकता हूँ|
मैं भारत का आम आदमी………….

हमने जिनको चुनकर भेजा,
भारत माँ की रक्षा को,
भूल गए वो कपूत सब,
अपनी नैतिक शिक्षा को,
कब तक पाले रहें हम,
इन आस्तीन के साँपों को,
अजगर जैसी विषधर का भी,
मैं सर कुचल सकता हूँ,

मैं भारत का आम आदमी…
हे माँ मुझको शक्ति दे दो,
इन गद्दारों से लड़ने की,
सत्यपथ पे कर्त्तव्य राह मैं,
हरदम आगे बड़ने की,
लाहौर कराची जैसी लंका,
पल भर मैं विध्वंस करूँ,
आतंकी चेहरों का सफाया,
चुटकी मैं कर सकता हूँ,

मैं भारत का आम आदमी…….
—-

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vikramjitsingh के द्वारा
September 6, 2012

आम आदमी इस देश में या तो अनशन कर सकता है….या हड़ताल…. हाँ अगर…..करना चाहे तो बहुत कुछ हो सकता है…..लेकिन दाल-रोटी से फुर्सत मिले तब ना…… विचारणीय प्रस्तुति…… सादर…….निर्भय जी……

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 6, 2012

    सही कहा विक्रम भाई, किन्तु व्यस्त क्षणों मैं से समय निकलना ही होगा

drbhupendra के द्वारा
September 5, 2012

बहुत सुन्दर रचना … आम आदमी के बल को यह कविता उसी तरह बल देगी जैसे की हनुमान को अपना बल याद दिलाया गया था … सुन्दर और सबसे बड़ी बात जोशीली आमंत्रित http://drbhupendra.jagranjunction.com/2012/09/05/%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3/

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 6, 2012

    भूपेंद्र जी, जन जागरण की दिशा मैं लेखनी के माध्यम से हम सभी जो कर रहे हैं, वह सार्थकता को उपलब्ध अवश्य होगा…आपके लेख भी पड़ने का अवसर मिला है, सधन्यवाद…आपका साथी..

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 5, 2012

हमने जिनको चुनकर भेजा, भारत माँ की रक्षा को, भूल गए वो कपूत सब, अपनी नैतिक शिक्षा को,    बेहद बहतरीन रचना दिल बाग -बाग हो गया ,,,,,

    Himanshu Nirbhay के द्वारा
    September 6, 2012

    आदरणीय सर जी, प्रणाम, हौसला अफजाई के लिए आभार..मन मैं जो क्रोध है कुव्यवस्था के प्रति, वही प्रस्तुत करने का प्रयास किया है…


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